स्याही का आखिरी कतरा"...

वक्त और वफ़ा का हिसाब अक्सर गणित के उन सवालों जैसा होता है, जिन्हें हल करते-करते पूरी उम्र बीत जाती है, मगर जवाब हमेशा 'शेष' (remainder) में ही बचता है।

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प्यार

लेखक : (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
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