यह महज़ एक विदा नहीं थी, बल्कि एक युग का अंत था। जब दो रूहें एक-दूसरे में इस कदर बस जाएँ कि सासों का हिसाब भी साझा होने लगे, तब बिछड़ना केवल शारीरिक अलगाव नहीं होता, बल्कि अस्तित्व का एक हिस्सा पीछे छूट जाना होता है।
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