लोग कहते हैं, अपने आप से मत भागो. मगर मैं बीस साल से अपने आप से भाग रहा हूँ. लोग कहते हैं, खुद से भाग कर भला कहाँ जा पाओगे! मैं कहता हूँ, कहीं भी, किसी सुनसान जगह, पत्थरों की गुफाओं में, या किसी बहुत अँधेरी जगह, जहाँ मेरा अक्स, मुझे दिखाई न दे, मुझे अपने होने का जरा भी गुमान न रहे – आज मैं भाग जाना चाहता हूँ बस उतनी दूर.
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