बलिया के घूंघट और संस्कारों की दहलीज लांघकर नेहा दिल्ली के इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंचती है। जहाँ कोडिंग की क्लास और हॉस्टल की रैगिंग के बीच, वह पहली बार अपने शरीर की अनजानी हलचलों से टकराती है। किताबों के बोझ तले दबी वह सीधी-सादी लड़की, अब खुद को खोजने के एक कामुक सफर पर है।
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