कॉलेज की एक साधारण सी दिखने वाली लड़की आकांक्षा, लेकिन उसकी ज़िंदगी उतनी साधारण नहीं थी… बचपन से वह एक पुरानी, रहस्यमयी हवेली में पली-बढ़ी थी। उस हवेली की दीवारों में जैसे अनगिनत राज़ छिपे थे, और हर कोना किसी अनजानी कहानी की गवाही देता था। वक्त के साथ आकांक्षा उस हवेली से दूर हो गई, लेकिन उसका अतीत वहीं ठहर गया। फिर एक दिन… कॉलेज की छुट्टियों में, वह अपनी दोस्त के साथ उसी हवेली में वापस लौटी, शुरुआत में सब सामान्य लगा… लेकिन धीरे-धीरे हवेली का सन्नाटा कुछ कहने लगा… अजीब आवाज़ें, अनदेखी परछाइयाँ, और एक ऐसा आईना… जो सिर्फ सच नहीं दिखाता था। और फिर… कुछ ऐसा हुआ… जिसके बारे में आकांक्षा ने कभी सोचा भी नहीं था। आखिर हवेली में ऐसा क्या छिपा है? क्यों आकांक्षा खुद को आईने में नहीं देख पाती? इन सभी रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए पढ़िए — "मैं आईने में क्यों नहीं दिखती हूं" 👁️
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