कहानी एक ऐसी जगह की...जहाँ सन्नाटा गूँजता है। जहाँ आप चिल्लाते हैं, पर शब्द बाहर नहीं आते। जहाँ आपकी अपनी परछाईं आपकी आवाज़ पहनकर आपके पीछे चलने लगती है। 10 दोस्त, एक हवेली, और एक डरावना खेल… यहाँ आवाज़ें गूंजती नहीं बल्कि गायब हो जाती हैं।हर एक को अपनी आवाज़ बचानी है… क्योंकि जिसने आवाज़ खो दी… वो कभी बाहर नहीं जाएगा। क्योंकि कोई सुन रहा है.... अपनी आवाज़ बचा सकते हो तो बचा लो... क्योंकि यहाँ सन्नाटा भी चीखता है।क्या होगा... अगर आपकी आवाज़ आपकी दुश्मन बन जाए?अंधेरे गलियारों में हज़ारों आवाज़ें कैद हैं, जो आपको पुकार रही हैं। क्या आप अपनी 'सच्ची' आवाज़ पहचान पाएंगे? या आप भी बन जाएंगे इस हवेली की दीवारों का एक खामोश हिस्सा?
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