रक्तगढ़ की ऊँची पहाड़ियों पर खड़ी रायजादा हवेली सालों से अपने अंदर एक ऐसा राज़ छुपाए बैठी है, जिसे समय भी मिटा नहीं पाया। २१ साल पहले, इसी हवेली की दीवारों के बीच एक औरत की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी — एक ऐसी औरत, जिसका इस हवेली से रिश्ता सिर्फ खून का नहीं, बल्कि हक का था। उस रात २१ लोगों ने मिलकर एक सच को दफना दिया… लेकिन कुछ कहानियाँ मिटती नहीं, सिर्फ इंतज़ार करती हैं — वापस आने का। अब, २१ साल बाद, आरोही की वापसी के साथ हवेली में कुछ बदलने लगा है। अजीब आवाज़ें, अनदेखे साये, और एक रहस्यमयी डायरी… अनजाने में ही आरोही उस ताकत को आज़ाद कर देती है, जो सालों से बदले की आग में जल रही थी। अब खेल शुरू हो चुका है — एक-एक कर हिसाब बराबर होगा। पर सबसे बड़ा सवाल ये है… क्या आरोही सिर्फ एक मोहरा है? या फिर इस खौफनाक कहानी से उसका रिश्ता उससे कहीं ज्यादा गहरा है?
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