महाराष्ट्र के जालना जिले के छोटे से गाँव एकलहरा में नदी के किनारे एक बहुत पुराना और रहस्यमय बरगद का पेड़ था। गाँव के लोगों के अनुसार उस पेड़ के नीचे गुप्त धन छिपा हुआ था और उसकी रक्षा एक विशालकाय नाग करता था। गाँव में एक गरीब परिवार रहता था जिसमें माता-पिता और उनके दो बेटे थे। वे खेती करके किसी तरह अपना जीवन चलाते थे। एक दिन गाँव के मंदिर में एक पुराना ग्रंथ मिला, जिसमें उस गुप्त धन का जिक्र था और साथ ही यह भी लिखा था कि उस धन के साथ एक भयानक श्राप जुड़ा हुआ है। गरीबी से परेशान उस परिवार को धन पाने की आशा हुई और वे रात में उस बरगद के पेड़ के नीचे खुदाई करने पहुँचे। खुदाई करते समय उन्हें जमीन के नीचे सुरंगें और एक विशाल साँप की केंचुली मिली। थोड़ी देर बाद उनका सामना उस विशाल नाग से हो गया। नाग ने परिवार से एक समझौता किया कि वह उन्हें गुप्त धन देगा, लेकिन बदले में परिवार को अपने एक बेटे को उसे देना होगा। लालच के कारण परिवार ने ग्रंथ में लिखा श्राप भूलकर अपने बड़े बेटे को नाग को दे दिया और गुप्त धन ले लिया। कुछ ही समय में वह गरीब परिवार बहुत अमीर बन गया। लेकिन उस धन के साथ जुड़ा श्राप सच हो गया। परिवार की आने वाली सभी पीढ़ियाँ मानसिक रूप से कमजोर पैदा होने लगीं और वे उस धन को समझ या सही तरह से उपयोग नहीं कर पाए। इस प्रकार यह कहानी सिखाती है कि लालच में लिया गया गलत निर्णय अंत में दुख और विनाश का कारण बनता है।
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