"वह… एक विष कन्या" रायचंद मैन्शन की दीवारों में एक मौत ने कदम रखा है, जिसने एक मासूम लड़की का मुखौटा पहना है। बरसों पहले जिसे तबाह किया गया था, वही राख आज एक सुलगता हुआ अंगार बनकर लौटी है। वह कोई साधारण लड़की नहीं, बल्कि एक विष कन्या है—जिसकी रग-रग में कातिलाना ज़हर बहता है। उसका मक़सद साफ़ है: जिस ख़ानदान ने उसका सब कुछ छीना, उन्हें एक-एक करके मौत के घाट उतारना। लेकिन उसके रास्ते का सबसे बड़ा काँटा वही लड़का बन जाता है, जो दुश्मन का बेटा है। उसका निश्छल प्रेम इस ज़हरीली नफ़रत को चुनौती देने लगता है। अब वह एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ उसकी एक चुम्बन उसके महबूब की जान ले सकती है। कौन है वह रहस्यमयी लड़की? क्या बदले की ये आग मोहब्बत के अमृत से बुझ पाएगी? क्या वह अपने ही ज़हर से अपने प्रेम को बचा पाएगी? तैयार हो जाइए एक ऐसी दास्तान के लिए, जहाँ हर स्पर्श मौत का पैग़ाम, तो क्या होगा जानने के लिए पढ़िए:-(Vish-Kanya: Ek Zehreeli Mohabbat")
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