कबीर ने अपनी ज़िंदगी गोलियों, आदेशों और सरहदों के बीच बिताई है। उसके लिए हर मिशन एक जंग है… और हर जंग में दिल की जगह नहीं होती। लेकिन फिर उसकी ज़िंदगी में आती है आरोही — एक साधारण लड़की, जिसकी मुस्कान उसके भीतर छुपे हर अँधेरे को धीमे-धीमे रोशन करने लगती है। जब दोनों को लगता है कि खतरों का सिलसिला खत्म हो चुका है… जब दुश्मन सलाखों के पीछे हैं… जब ज़िंदगी आखिरकार सामान्य होने लगी है… तभी शुरू होता है असली खेल। अनजाने कॉल। अजीब संकेत। छुपी हुई निगाहें। और एक ऐसा mastermind… जो सामने आए बिना हर चाल चल रहा है। कबीर को समझ नहीं आता — ये हमला बाहर से है… या उसके अपने अतीत से? और जैसे-जैसे कबीर और आरोही एक-दूसरे के करीब आते हैं, वैसे-वैसे कोई उन्हें अलग करने की तैयारी कर रहा है। इस बार जंग सिर्फ देश के लिए नहीं… प्यार के लिए है। लेकिन सवाल वही है — क्या हर मोहब्बत को उसका अंजाम मिलता है… या कुछ प्यार सिर्फ अख़री दुआ बनकर रह जाते हैं?
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