ये कविता समय की कीमत और आत्म-सुधार का संकल्प है। बीते हुए पछतावों से सीख लेकर, हर पल को संजोने और खुद को बेहतर बनाने की ठान लेने की कहानी है। अब वक़्त किसी और का नहीं — अपने सपनों और अपने फ़र्ज़ का है।
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