इन आँखों पर क्या लिखूं।

यह रचना आँखों के भीतर छुपे भावों की कहानी है— उनकी ख़ामोशी, ख़ुशी, थकान, उम्मीद, चाहत और टूटे सपनों की। आँखें कभी आईना बनकर सच दिखाती हैं, तो कभी पर्दा बनकर खुद को छुपा लेती हैं। कविता इस सवाल पर ठहरती है कि जब आँखें सब कुछ कह चुकी हों, तो उनके बारे में और क्या लिखा जाए—सिवाय उस सच के, जो पहले ही ज़िंदगी ने लिख दिया है।

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कविता

लेखक : King
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