ये कहानी 2013 की केदारनाथ त्रासदी की सच्ची और कलेजा चीर देने वाली घटना पर आधारित है। रूद्राक्ष जो एक भूविज्ञानी होने के साथ-साथ इसी मिट्टी का बेटा है , और छुट्टियों में अपने गांव लौटता है , पर उसका वापस आने का मकसद एक वैज्ञानिक डेटा था , जो क्लाउडबर्स्ट और ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट की चेतावनी दे रहा था , वही गांव के लोग धारी देवी के विस्थापन का विरोध कर रहे थे , और तब आया वो मंजर जिसने सबकी रूह को कांपने पर मजबूर कर दिया , चोराबारी ताल फटा और मंदाकिनी ने रौद्र रूप धारण किया , तब रुद्राक्ष ने अपनी आँखों से इंसानी विकास के घमंड को ताश के पत्तो की तरह ढहते देखा। क्या बीती उन लोगों पर जो उस तबाही के गवाह बने हम इस कहानी के माध्यम से जानेंगे !
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