हलाला की रातें: एक मजबूरी का प्यार

एक मुस्लिम घराने में गुस्से की एक पल में तीन तलाक हो जाता है। पति पछताता है, लेकिन शरिया के मुताबिक वापसी के लिए निकाह हलाला जरूरी है। मजबूरी में देवर (21 साल का जवान लड़का) से हलाला करवाया जाता है। जो रस्म से शुरू होता है, वो तीन रातों में गहरा जुनून और प्यार बन जाता है। परिवार टूटता है, लेकिन प्यार बच्चों को वापस लाकर नई जिंदगी देता है। दर्द, मजबूरी, शर्म, और आखिर में उम्मीद की ये कहानी मुस्लिम समाज की कड़वी हकीकत और इंसानी जज्बातों को बयान करती है।

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प्रेरक

: Kavya Jain
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