जिंदगी की असली कीमत

किसी के पास सब कुछ है, फिर भी कुछ न कुछ कम लगता है। किसी के पास कुछ भी नही, फिर भी मन खुशी से भरपूर हैं। तो सुख किसका है? किसीके पास बहुत लोग हैं, फिर भी अकेलापन है। किसीके पास कोई नहीं, फिर भी दिल हल्का है। तो अमीर कौन है? किसीके सपने पूरे हैं, फिर भी आँखों से नींद कोसों दूर है। किसीके सपने अधूरे हैं, फिर भी गहरी नींद हैं। तो जीत किसकी हुई? जब तक है जिंदगी उतार चढ़ाव भरपूर है जिस दिन मर गए बस सीधी लकीर                                  __________

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कविता

लेखक : Anu
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