चाशनी ने अपने मां बाप के इंतजार में पूरा जीवन गुजार दिया हर पल इंतजार करती रही अपने के प्यार के लिए हर पल तरसती रही अपने की ममता के लिए। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था एक कैद से निकलकर वो दूसरी कैद में जा गिरी…जहाँ ना प्यार था,ना सम्मान,ना चैन की नींद। वो दुल्हन बनी… मगर बिना शादी के।ना मांग सजी,ना फेरे हुए, ना किसी ने उसका हाथ थामा। बस एक कागज़ का टुकड़ा और उसी ने चाशनी की पूरी ज़िंदगी छीन ली।अब वो ना मर सकती है, ना जी सकती है। उसकी हर साँस, हर धड़कन… अब किसी और की कैद में है
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