रुकने की इच्छा- Jîज्ञासा

कुछ लोग जाते हुए भी रुकने की उम्मीद छोड़ जाते हैं। यह कविता उसी मनःस्थिति पर आधारित है जहाँ शब्द जाने के होते हैं, पर मन अब भी ठहरना चाहता है। यह एक डायरी का पन्ना है, जो शायद आपने भी कभी जिया हो।

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मेरी डायरी

: Jîज्ञासा
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