रिवांश रॉय कपूर, एक ऐसा नाम जिसकी दुनिया कभी खुशियों से भरी थी, लेकिन एक झूठे मोलेस्टेशन (छेड़छाड़) के इल्जाम ने उसकी ज़िंदगी की दिशा ही बदल दी। इस एक कलंक की वजह से समाज ने उसे ठुकरा दिया, सदमे में उसकी माँ की मौत हो गई और उसके अपने पिता ने भी उसे बेसहारा छोड़ दिया। अपनों की बेरुखी और दुनिया की नफरत ने हंसते-खेलते रिवांश को एक पत्थर दिल इंसान बना दिया। उसके जीने का अब सिर्फ एक ही मकसद था—उस लड़की को ढूंढना जिसकी वजह से उसका सब कुछ बर्बाद हुआ, और उसे वैसी ही तड़प भरी सजा देना। 7 साल बाद, रिवांश का सामना आन्या से होता है। रिवांश को पूरा यकीन है कि आन्या ही वही लड़की है जिसने बरसों पहले उस पर झूठा इल्जाम लगाया था। अपने बदले की आग में अंधा होकर रिवांश, आन्या को ऐसी परिस्थितियों में घेर लेता है कि उसे मजबूरी में उससे शादी करनी पड़ती है। शादी के बाद रिवांश का असली जुल्म शुरू होता है; वह आन्या को प्यार के बदले नफरत देता है और हर पल उसे मानसिक और भावनात्मक तौर पर तड़पाता है। आन्या, जो पूरी तरह बेगुनाह है, रिवांश की इस नफरत की वजह समझ नहीं पाती और चुपचाप अपना नसीब मानकर सब सहती रहती है। कहानी में सबसे बड़ा धमाका तब होता है जब एक दिन रिवांश के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। उसके सामने वह कड़वा सच आता है कि आन्या वह लड़की है ही नहीं जिसे वह ढूंढ रहा था। आन्या तो पूरी तरह मासूम थी, जिसने अनजाने में रिवांश के गुस्से और नफरत की भारी कीमत चुकाई। अब रिवांश के पास पछतावे के सिवा कुछ नहीं बचा। क्या रिवांश खुद को माफ कर पाएगा? क्या आन्या उस शख्स को अपना पाएगी जिसने उसकी रूह तक को जख्मी कर दिया? और सबसे बड़ा सवाल—कौन है वह असली लड़की जिसने रिवांश की जिंदगी तबाह की? इन्ही सवालों के इर्द-गिर्द घूमती है यह जज्बाती कहानी।
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