सावित्री और अर्जुन की प्रेम कहान

गाँव का नाम था सरसई, जहाँ कच्चे रास्तों पर बैलगाडियों की चरमराहट और चौपाल पर शाम को चाय की चुसकियों के साथ चलती गप्पे आम नराजा थी।

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प्यार

: Moon
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