कहते हैं, एक गलतफहमी कई ज़िंदगियों को पलभर में तबाह कर देती है… और कुछ ऐसी ही कहानी है अरनव और अव्नी की। छह साल पहले सारा की दुनिया सिर्फ एक नाम के इर्द-गिर्द घूमती थी—अरनव। उसकी हँसी, उसकी मौजूदगी, उसका ज़रा-सा ध्यान भी अव्नी के दिल को धड़कनों से भर देता था। लेकिन तक़दीर ने उन्हें छह साल पहले जुदा कर दिया। और जब आज, इतने लंबे समय बाद, किस्मत ने उन्हें फिर सामने खड़ा किया। तो सामने खड़ा अरनव वही नहीं था। जिसे अव्नी की जानती थी। अरनव बदल चुका था—बहुत ज़्यादा। उसकी आँखों में अब अव्नी के लिए प्यार नहीं, सिर्फ नफ़रत थी। नफ़रत भी ऐसी, जो उसके सीने में वर्षों से पल रहे बदले से जन्मी थी। उसे लगता था कि अव्नी के पिता ने उसकी ज़िंदगी बरबाद की है, उसके परिवार को मिटाया है, और उसने कसम खाई थी कि वो ये दर्द किसी भी तरह लौटाएगा। और उस बदले की कीमत उसने चुनी… सारा। अव्नी, जो अपने पिता को बेगुनाह साबित करने के लिए हर दर, हर दहलीज़ पर सिर झुका चुकी थी। जिसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस इंसान से वो चुपचाप, दिल ही दिल में प्यार करती थी। वही एक दिन उसके ज़ख्मों का सबसे बड़ा कारण बन जाएगा। अरनव ने उससे जबरदस्ती शादी न प्यार की वजह से, न किसी रिश्ते की बुनियाद पर, बस बदला लेने के लिए। हर दिन, हर पल वो कोशिश करता कि अव्नी टूट जाए, बिखर जाए, उसकी आँखों की रोशनी बुझ जाए। वो उसे छोटी-छोटी बातों पर ताना देता। कभी उसकी मासूमियत पर शक करता... कभी उसके घर वालों की इज्ज़त पर वार करता। अव्नी की हर सांस जैसे अरनव के बदले का इम्तिहान बन चुकी थी। पर किसी ने सच ही कहा है—प्यार ख़ामोश हो सकता है, खत्म नहीं। अव्नी का दिल, जो छह साल पहले अरनव का था...आज भी उसी का है। नफ़रत के हर वार के बाद भी, उसकी आँखों में अभी भी प्यार की एक छोटी सी लौ है। जो बुझने से इनकार करती है। लेकिन प्यार जितना खूबसूरत है, उतना दर्दनाक भी। और अब अव्नी के पास एक ही सवाल है..... क्या उसका प्यार इस नफ़रत को पिघला पाएगा? क्या अरनव कभी ये समझ पाएगा कि अव्नी उसके खिलाफ नहीं, उसके साथ खड़ी है? कि जिस इंसान को वो अपना दुश्मन समझता है, वही उसकी रूह का सबसे सच्चा हिस्सा है? या फिर अरनव अपने बदले की आग में इतना अंधा हो जाएगा कि अव्नी की ज़िंदगी को हमेशा के लिए अंधेरों में धकेल दे? क्या प्यार जीतेगा… या गलतफहमी? अरनव और अव्नी की यही लड़ाई है—दिल की, दर्द की, और एक सच की, जिसे जानना दोनों के लिए ज़रूरी है। पर सवाल ये है… सच सामने आने से पहले, क्या दिल बचेगा? या टूटा हुआ दिल ही इस कहानी का मुकाम बनेगा? जानने के लिए...........🌹🌹 आप सबको थोड़ा इंतजार करना होगा.....✍️✍️ एक दिसम्बर को आने वाली हैं। ...... ये कहानी ( एक तरफा प्यार ) 💔!!!......💔✍️✍️ “उसने कभी चाहा ही नहीं हमें चाहने के लिए। और हम उम्र भर उसकी एक मुस्कान के लिए तरसते रहे…” 💔 आपकी प्यारी लेखिका = श्वेता अग्रवाल ✍️🔥🥰❤️🥰।।
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