मैं नाजायज नहीं हूँ

नहीं माँ तुम मुझे इस तरह अकेला छोड़कर नहीं जा सकती हो। मेरा इस दुनियां में तुम्हारे बिना कोई नहीं है। तुम जाने से पहले उसका नाम तो बता देती जिसने तुम्हें इस तरह अकेला छोड़ दिया था। मैं उसका गिरेबान पकड़कर यह तो पूछ लेता कि इसमें तुम्हारा क्या कसूर था?

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लघु कथा

: नरेश शर्मा
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