मेरी आशा

आशा,एक सरल और सीधी-साधी लड़की जिसके जीवन की एक ही आशा है,जो कोई आशा नहीं है। हमारी आशा को जीवन से कोई आशा नहीं है,सिर्फ परिवार की खुशी और कुछ नहीं। ‘शुक्ला परिवार’, पूजा-पाठ और सच्चाई से इस परिवार का हर एक सदस्य पला है। ‘आशा’ राम शुक्ला की इकलौती बेटी है। राम के छोटे भाई 'मोहन' की दो बेटियाँ हैं। माँ जानकी की आँखों कि तारा आशा अपनी चाची त्रिशला को भी भाती थी। त्रिशला की बड़ी बेटी ‘जिया’ सिर्फ ऊपरी रूप से ही सुन्दर नहीं थी,परंतु दिल की भी उतनी ही सुन्दर थी। जिया आशा की ही परछाई थी। उसकी छोटी बहन ‘काया’ कभी समझ ही नहीं आती थी,कभी फूल तो कभी काटें। अब यह तो हुई आशा की बात,अब आप सबको हम आगे के सफर में ले चलेंगे जहाँ ज़िंदगी की निराशा को आशा में बदल देगी ‘मेरी आशा’।

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उपन्यास

: Karishma
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