दीपक की रोशनी

जलाओ दीप को, दहलीज पर अपनी, ताकि कोई राही न भटके राहों में। ये जीवन है, इसे रोशन करते चलो, जैसे दीपक जलता है सदा चाहों में।

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कविता

लेखक : Simple Human
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