अनदेखी मोहब्बत ❤️

चेहरा जो कभी सामने नहीं आता, फिर भी हर लम्हे, हर सांस में महसूस होता है। "अनदेखी मोहब्बत" एक ऐसी ही दास्तान है, जहां मिलन से ज़्यादा मायने रखती है दूरी की सच्चाई, जहां ख़ामोशी भी संवाद बन जाती है, और इंतज़ार, एक इबादत का रूप ले लेती है। यह श्रृंखला उन दिलों के लिए है। जो किसी को बिना देखे, बिना छुए, बिना पाए भी टूटे बिना चाहते हैं। हर भाग में एक नया रंग है ....कहीं तड़प की तपिश, कहीं उम्मीद की नमी, तो कहीं खामोशियों का बोझ, तो कहीं बसा है यादों का नशा। यह ग़ज़लें किसी एक चेहरे की नहीं, बल्कि हर उस एहसास की कहानी हैं, जो हमारे भीतर चुपचाप जन्म लेती है और ज़िंदगी भर सिसकते हुए भी मुस्कुराना सिखा जाती है। यह “अनदेखी मोहब्बत” उन सभी के नाम, जो किसी को सिर्फ़ दिल से जानते हैं, और जिन्हें मालूम है ....कि सच्ची मोहब्बत को देखने के लिए आंखें नहीं, बस रूह चाहिए।

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कविता

: Sukoon Bazzad ✍️
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