बिन मौसम बरसात

आसमान भी शायद कुछ कहना चाहता, आँसू बनकर वो बहना चाहता। बे-मौसम सही, पर दिल छू जाता, हर बूंद में कोई अफ़साना बरस जाता। 🌧️

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दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
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