बीस साल का अर्जुन जब जापान आया, तो उसके ऊपर अपने पूरे परिवार का बड़ा सपना और ज़िम्मेदारी थी। भारत का शोर छोड़कर, वह टोक्यो बड़ी कामयाबी हासिल करने के लिए आया था। लेकिन यहाँ आकर सब उल्टा हो गया। थकाने वाली पढ़ाई, अकेलापन और लोगों की उम्मीदों के लगातार दबाव ने धीरे-धीरे उसका मकसद ख़त्म कर दिया। अर्जुन अब खुद को खाली और हारा हुआ महसूस करता है, जो बस अपनी मुश्किल रूटीन काट रहा है। उसका दौलत और कामयाबी का सपना एक बुरा सपना बन गया है, और उसे यकीन हो जाता है कि इस परदेस में उसकी ज़िंदगी बर्बाद हो चुकी है। एक उदास आधी रात, उसका सारा दुख छलक जाता है। अपने छोटे कमरे की चुपचाप अँधेरी में, अर्जुन रोता है यह सोचकर नहीं कि वह हार गया, जब वह बिना किसी आवाज़ के आती है, एक अजीब और रहस्यमय लड़की, जो परछाइयों से निकलकर सामने आती है। वह उसे तसल्ली नहीं देती, न ही आसान सलाह, वह उसे भागने का एक रास्ता देती है , एक ऐसा रास्ता जो अर्जुन के जापान आने के पीछे के हर समझदार नियम के ख़िलाफ़ है। "Raat Ki Pukaar" उस कहानी का नाम है जहाँ फ़र्ज़ के भारी बोझ को छोड़कर, मनचाही आज़ादी को चुना जाता है। उसका अचानक आना अर्जुन की ज़िंदगी में एक बड़ा मोड़ है, जो उसे उसकी अपनी बनाई हुई कैद से बाहर निकालकर एक छुपी हुई रात की दुनिया में ले जाता है, जहाँ उसकी ज़िंदगी बर्बाद होना बंद हो जाती है और एक रोमांचक और खतरनाक राज़ बन जाती है।
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