तेरी मुस्कान

तेरी मुस्कान, जैसे थकी हुई ज़िंदगी में एक नई सुबह, जो बिना कुछ कहे, सब कुछ कह जाती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : विजय सांगा
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