तक हमारे समाज में अहंकार, ईर्ष्या, लालच और स्त्री-असमानता जिंदा है — तब तक रावण भी जिंदा रहेगा। इसलिए जरूरत है केवल रावण का पुतला जलाने की नहीं, बल्कि अपने भीतर के अंधकार को पहचानने की। तभी हम कह पाएँगे — “अब रावण सच में मर गया।”
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