मिट्टी के दिये

ये कविता बताती है कि सच्ची रोशनी दिखावे में नहीं, सादगी में बसती है, जैसे मिट्टी का दिया अंधेरों में भी उम्मीद जगाता है।

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: विजय सांगा
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