यह कविता 'स्त्री की आत्मा' और उसके 'मौन संघर्ष' के भावों में डूबी हुई है। इसे पढ़ने के बाद अपनी उत्साहवर्धक समीक्षा जरूर दीजियेगा।
1. मैं धूप-छांव की परछाई हूं। 41 | 32 | 31 | 5 | | 12-10-2025 |
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