परछाई

मेरे संग-संग चलती हो, कौन हो तुम अनजानी? कभी लंबी, कभी छोटी, क्या है तेरी कहानी? जबसे होश संभाला है, तुमको साथ पाया है, मेरे हर आकार में ख़ुद को, तुमने वैसे ढाला है। मैं चुप रहूँ तो तुम भी, ख़ामोशी ओढ़ लेती हो, मैं चल दूँ तो मेरे संग, तुम भी राहें मोड़ लेती हो। तुम कौन हो जो मुझसे ही बनकर, मुझसे सवाल करती हो?

23 Views
Time : 2 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: Erica
img