तेज़ाब से झुलसी एक क्रिकेटर देविका की ज़िंदगी तब बदलती है जब वह अपने डर से लड़ने का फैसला करती है। हिम्मत, जज़्बे और आत्मविश्वास से वो फिर मैदान में लौटती है, जीतती है, और समाज को सिखाती है। बदसूरती चेहरे में नहीं, सोच में होती है। यह कहानी है हौसले की, नहीं हार की।
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