मां के शब्द अक्सर जीवन की सबसे ऊंची सीख बन जाते हैं। जब वो अपने अंतिम वक्त में भी हमें संभालना चाहती है, तो हर वाक्य किसी पर्वत की चोटी जितना स्थायी हो जाता है। यह कविता एक ऐसी ही मां की कहानी है। जो अपनी बेटी को धैर्य, मौन और मजबूती की “पर्वत जैसी सीख” देकर जा रही है। पसंद आए तो लाइक और समीक्षा दिजिए गा 🙏
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