धूप पड़े या छाए बादल, मैं न कभी डगमग होता हूँ। ठंडी बर्फ़ की चादर ओढ़े, फिर भी ऊँचा खड़ा रहता हूँ।
1. पर्वत की सीख 14 | 11 | 13 | 5 | | 08-10-2025 |
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