पर्वत की सीख ऊँचा है पर्वत, गर्व नहीं, हर मुश्किल में हार नहीं। धूप पड़े या आये बरसात, अडिग रहे वो दिन और रात। शिखर पे बैठा नभ को छूता, फिर भी धरती से जुड़ा रहता। सिखाता है इंसान को ये बात, नम्रता में ही है असली जात। सर्द हवाएँ आएँ चाहे, या बिजली गरज के डराए। पर्वत कहे — “मत टूटना कभी, सहनशीलता है शक्ति सभी।” बर्फ से ढका, फिर भी धीर, मन में रखता शीतल नीर। कहता है — “थामे रखो विश्वास, हर सर्दी के बाद है उजास।” राह दिखाता साहस की, जीवन की हर आस की। पर्वत की सीख यही बतलाए, जो टिक जाए, वही जग में छाए। श्वेता अग्रवाल 😌✍️✍️🖤
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