हद पार हो गई है विवेक

अहमदाबाद का विवेक, एक साधारण युवक, जब रिश्तों और हालातों की सीमाएँ पार होते देखता है, तो उसके भीतर की चुप्पी शब्द बन जाती है। टूटे भरोसे, बिखरे सपनों और आत्मसम्मान के संघर्ष से गुजरते हुए वह सीखता है। हर अंत, एक नई शुरुआत की दस्तक होता है।

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : साइलेंट लफ्जो का सफर
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