तीसरा कौन?

                  मैं... रवि संघमित्रा... प्राइवेट डिटेक्टिव... एक नये सेंसेशनल केस के साथ आपलोगों के समक्ष उपस्थित हूँ.... मेरे पिछले केस MURDER पार्ट वन को आपलोगों ने बेहद पसंद किया है खास कर सोनिया मल्होत्रा नामक कैरेक्टर को... आज हम फिर से आपको एक नये केस से रूबरु करवाना चाहते हैं जिसमें आपको सस्पेंस, रोमांस और रोमांच से भरपूर थीम पढ़ने को मिलेगा.... तो आईये शुरू करते हैं एक नये कहानी के साथ, दिल थाम कर बैठिये...         कहानी शुरू होती है एक 34 साल के सभ्य महाशय से से जब मैं अपने केबिन में बैठा यूँ हीं एक सस्पेंस थ्रीलर नोबेल पढ़ रहा था... अचानक मुझे एक अनजान नंबर से कॉल आता है जब मैंने उसे उठाया तो एक मर्द कि सख्त आवाज मेरे बाएँ कान से टकराती है क्योंकि मेरे दाएँ हाथ में एक उपन्यास था... " यस... रवि संघमित्रा स्पीकिंग.... " उधर से आवाज में भारीपन का अहसास हो रहा था मुझे... " क्या मैं आपसे इस वक्त मिल सकता हूँ मिस्टर संघमित्रा साहब.... " " आप कौन बोल रहे हैं...? " जो एक नॉर्मल फॉर्मेलिटी है... " मैं सामने में परिचय देना पसंद करूँगा वैसे एक मिनट, मुझे आपसे एक केस पर बात करनी है... तो क्या मैं आ सकता हूँ... " " ऑफकोर्स... क्या आप अभी आना चाह रहे हैं मिस्टर, वैसे आपको मेरा एड्रेस पता है....? " जी हाँ... मैं बस एक घंटे में पहुँच रहा हूँ कहीं जाना नहीं है आपको... " " ऑफकोर्स नॉट... आईएम वेटिंग फोर यू... " " थैंक्स...         तब तक मैं उस उपन्यास को जल्द से जल्द खत्म करने कि मुहीम में जुट गया, दरअसल अगर यह केस मुझे मिल जाता है, तब मुझे फुर्सत नहीं मिलेगी इस उपन्यास को खत्म करने कि.... इसी बहाने कुछ पैसे कमाने का भी अवसर मिल जायेगा... मैंने अपनी एक टिनेज अकाउंटेंट को कॉफी बनाने को बोल दिया... " पूजा... "        फिर से मुझे कॉफी के लिये हीं तंग करेंगें जैसे मैं इनकी बीबी हूँ.... खुद तो मैडम यूनिवर्सिटी भाग जाती हैं मेरे भरोसे छोड़ कर कहीं घपला हो गया तो मुझे दोष मत देना मैडम... अपने हस्बैंड को सँभाल कर रखा करो... " यस सर... " " एक कप कॉफी प्लीज.... " " यस सर... " इनकी तो... मैं समझ हीं रही थी, एक तो ठीक से वेतन टाइम पर नहीं मिलता भले हीं मिल तो जाता है यही बहुत बड़ी बात है आज के खर्चीले जमाने में...        तो इस तरह से मेरी अकाउंटेंट पूजा उठकर कॉफी बनाने में जुट गयी... मेरी मिसेज शान्या का तो भई कहना हीं क्या है, यूनिवर्सिटी और घर यही उनकी जिंदगी बन कर रह गयी है... मैं अपने नीचे के ऑफिस में अपने दो जूनियर के साथ बस केस पर रिसर्च करता रहता हूँ... मैं तो भगवान से बस यही मनाता रहता हूँ कि हर घर में लफड़े होते रहें ताकि मेरा घर चलता रहे... बस मेरे घर में लफड़े छोड़कर...        तो... पूजा फटाफट काम खत्म कर मेरे सामने एकदम से हाजिर हो गयी... " सर, आपकी कॉफी... " मैंने नोबेल पर से नजर हटाया और चश्मे के अंदर से उसके मासूम से मुखड़े को देखा... " और तुमदोनों के लिये... " " हमदोनों भी ले रहे हैं लेकिन पहले आपको जल्दी है... इसलिए... " मेरी जरुरत बता रही है या टोंट मार रही है, खैर मुझे इससे क्या... मैंने कॉफी उसके हाथ से पकड़ लिया और उसे पलट कर किचेन कि तरफ मुड़ कर जाते हुए देखता रहा... " बेहद तीखी मिर्ची है, शादी के बाद ये अपने हस्बैंड को नाच नचा कर रख देगी, इसका यहाँ बस नहीं चलता है वरना... " खैर छोड़ो....         फिर कॉफी कि चुस्की लेते हुए मैं नोबेल पढ़ने में व्यस्त हो गया... मैंने सिर उठा कर एक बार दीवाल घड़ी में समय देखा, उस व्यक्ति को आने में काफी वक्त लगने वाला है अतः फिर से उपन्यास में व्यस्त हो गया... -------------------------------------------         अचानक मेरे स्मार्टफोन का रिंगटोन बज उठा जोर से... शायद पूजा का दिमाग फिर से भन्ना गया होगा मैं समझ रहा हूँ... मैंने नम्बर चेक किया... तो जनाब आ चुके हैं.... " हैल्लो, क्या आप पहुँच गए मेरे एड्रेस पर.. " " हम्म्म्म... सिर्फ एड्रेस पर, आपके घर पर नहीं... क्या आप थोड़ा बाहर निकल कर मुझे रिसीव कर सकते हैं...? " " हाँ क्यों नहीं... मैं अभी बाहर निकलता हूँ... "         मैं फोन ले कर ऑफिस से बाहर निकल गया और गार्ड्स को इशारा किया... इशारा समझते हीं उसनें सेमी आटोमेटिक फाटक एक बटन के दबाने से खुलता चला गया.... मैं अब राजीव के सिक्योरिटी जोन में हूँ और उसके संरक्षण में भी क्योंकि दुश्मनों का कोई भरोसा नहीं है कब, कहाँ, किधर से आ टपकें... वैसे भी गोवा कांड के बाद यहाँ पर बॉडीगार्ड्स द्वारा सख्त सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया है और साथ हीं सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा ड्रोन सुरक्षा सिस्टम भी मुहैया करवा दिया गया है, उधर SSP को भी सख्त हिदायत दी गयी है सुरक्षा के मद्देनज़र... मुझे अपना खुद का उसी सिक्योरिटी रिजन में एक मस्त फ्लैट मिला हुआ है अतः अब मैं निश्चिन्त हो कर अपने काम पर कंसन्ट्रेट हो सकता हूँ....         जब फाटक धीरे धीरे खींसकते हुए पूरी तरह से खुल गया तब सामने एक ब्लैक कलर कि शानदार थार खड़ी नजर आने लगी थी... मालदार पार्टी लग रहा है, इससे मुझे इनकम जबरदस्त हो सकता है.... मैंने उसे अंदर आने का इशारा किया लेकिन गार्ड्स ने पहले उसकी अच्छे से तलाशी ले डाली... अच्छा हुआ पैंट के अंदर नहीं ली... खैर....       अच्छी खासी तलाशी के बाद उसे मेरे ऑफिस में जाने कि परमिशन दे दी गयी... वो बेचारा हक्कबक्का रह गया कि वह किसी प्राइवेट डिटेक्टिव के पास आया है कि देश के प्राइम मिनिस्टर के पास.... हमदोनों ने अपने - अपने कुर्सी अच्छे से पकड़ लिये... " सॉरी महाशय, आपको तकलीफ देने के लिये... एक्चुअली सिक्योरिटी मुद्दा हमारा अब चैलेंज बन गया है आप समझ रहे होंगे, बड़े लोगों कि बड़ी बातें... " " जी हैं... " मैंने अपनी अकाउंटेंट पूजा को फिर से टोका... " पूजा... दो प्लेट कॉफी, जल्दी.... " बेचारी चश्मा सँभालते हुए अनमने मन से उठी.... आज मुझे ये खड़ूस कोई काम नहीं करने देगा... जी तो करता है कि ये नौकरी हीं छोड़ दूँ... अकाउंटेंट के बदले मैं तो मैड बन कर रह गयी हूँ... " यस सर... " और वह फाटक से किचेन में घुस गयी...        इस बार अगर मुझे टाइम पर पेमेंट नहीं मिला तो देख लेना खड़ूस, सबके सामने इस बाबुगिरी कि इज्जत उतार दूँगी... बड़ा आये डिटेक्टिव बनने हट.... . . . To be continue....💋..... 

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KALPANA MANTHAN PRATIYOGITA ~ 1 ( STORY )

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