मैं अपने ही पिंजरे में कैद हूँ, जहाँ मेरी ही सोच और डर मुझे बाँध लेते हैं… बाहर निकलने की चाह तो है, पर हिम्मत की डोर अभी कमज़ोर लगती है।🍂
1. मैं अपने ही पिंजरे में... 15 | 9 | 13 | 5 | | 03-10-2025 |
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