सच की राह कठिन बहुत है, काँटों से भरी मंज़िलें हैं। पर जो उस पर चल पड़ता है, वो अमर गाथा लिख देता है।
1. सचाई 18 | 15 | 15 | 5 | | 02-10-2025 |
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