कलियुग का रावण

यह कविता आज के कलियुग में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, हिंसा और सामाजिक अन्याय पर प्रकाश डालती है। रावण का प्रतीक केवल पुराने समय का नहीं, बल्कि हर उस बुराई का प्रतीक है जो नारी की स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा को रोकती है। कविता का संदेश है कि सच्ची विजय तब होगी जब हम समाज से औरतों पर अत्याचार को मिटाकर उन्हें समान अधिकार, सुरक्षा और सम्मान देंगे। Agar behen beti bahar safe fill nhi kar Rahi hai eska matlab बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का कोई मतलब नहीं है। अभी कलियुग का एक ही चरण है आगे और भी खतरनाक साबित होगा इसलिए अपने बहन बेटियों को इतना मजबूत और शक्तिशाली बना दो कि कोई छुने से पहले हजार बार सोचें।

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कविता

: Shekhar Abhash
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