“कचरे में बचपन” एक मार्मिक शहरी कथा है, जो एक ऐसे मासूम बच्चे की ज़िंदगी को सामने लाती है जिसे अपना बचपन कचरे के ढेरों में तलाशना पड़ता है। कहानी में गरीबी, शोषण और हालात से जूझते हुए भी बच्चे के सपनों और हौसलों को उजागर किया गया है। यह केवल दुख की गाथा नहीं, बल्कि उम्मीद और इंसानियत की किरण भी है, जो बताती है कि हर बच्चा शिक्षा, प्यार और एक बेहतर जीवन का हकदार है। कहानी समाज से सवाल करती है – क्या कचरे के ढेरों में पलते ये मासूम कभी अपनी असली उड़ान भर पाएंगे?
© Copyright 2023 All Rights Reserved