मिट्टी के घर

मिट्टी का घर, मासूम कहानी, सादगी में बसती है इसमें जवानी। न ईंट, न सीमेंट, न शानो-शौकत, बस प्रेम का बंधन और रिश्तों की हसरत। बरसात की बूँदें जब छत पर गिरतीं, संगीत सी धुनें दिल में उतरतीं। आँगन में तुलसी, दीये की रोशनी, हर सुबह देती नई ताज़गी। गर्मी में ठंडा, सर्दी में गरम, हर मौसम में देता सुकून भरम। चूल्हे की खुशबू, माँ की रसोई, हर कोना महकता जैसे कोई होई। दादी की कहानियाँ, छत पर सितारे, बचपन के सपने उड़ते किनारे। न ताले की चिंता, न दरवाज़े बंद, भरोसे से चलता हर एक छंद। महल भले ऊँचे हों शानो-शौकत के, पर मिट्टी का घर दिल के बहुत नेक। यहाँ हर दर्द भी मुस्कान में ढलता, हर टूटा सपना नए सपनों से मिलता। मिट्टी का घर, बस आशियाना नहीं, यह जीवन की सबसे प्यारी निशानी वही। 🌿 श्वेता अग्रवाल ✍️✍️

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: ♥️𝄟≛⃝Sweta Agrawal🌹❤️ 🕊
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