औंस की बूंद

औंस की बूंद गिरती है नभ से, धरती के आँचल में सिमटती है सब से। छोटी-सी पर जीवन का आधार, इसके बिना कैसा संसार। बादलों से टूटकर आती, हर प्यासे दिल को तृप्त कर जाती। खेतों की फसल मुस्कुराती, हरियाली धरती पर छा जाती। औंस की बूंद है अमृत समान, देती है जीवन, करती कल्याण। नन्हीं-सी बूंद में शक्ति अपार, प्यास बुझाती, जगाती उद्धार। पत्तों पर मोती-सी चमकती, सूरज की किरणों संग दमकती। माँ के आँचल जैसी ठंडी, मन को शीतल करती गहरी। रेगिस्तान में हो तो वरदान, गंगा जैसी बन जाए पहचान। औंस की बूंद में छिपा सागर, लाती है सबके लिए सुहागर। बच्चों के होंठों पर मुस्कान, जब बूंदें छू लें उनकी जान। प्यासी चिड़िया पंख फैलाए, औंस की बूंद को आँखों में पाए। नन्हा पौधा झूम उठे जब, औंस की बूंद छुए उसके सपन। मनुष्य चाहे सोना पा ले, पर बूंद के बिना जीवन क्या ले। छोटी-सी बूंद का गान महान, इससे ही बनता जीवन का मान। औंस की बूंद है परम उपहार, सहेज लो इसको, रखो सत्कार। धरती हँसती, नभ गाता गीत, औंस की बूंद से मिटे हर प्रीत। श्वेता अग्रवाल ✍️

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: ♥️𝄟≛⃝Sweta Agrawal🌹❤️ 🕊
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