औंस की बूंद

क्षण भर को बस ठहर सकी, फिर हवा ने छू लिया, ना शोर किया, ना दर्द दिखाया, बस मिट गई, जैसे थी ही नहीं।

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दैनिक प्रतियोगिता

: rani
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