क्षण भर को बस ठहर सकी, फिर हवा ने छू लिया, ना शोर किया, ना दर्द दिखाया, बस मिट गई, जैसे थी ही नहीं।
1. औंस की बूंद 22 | 10 | 14 | 5 | | 20-09-2025 |
© Copyright 2023 All Rights Reserved