गरीबी की चीख

शहर की झुग्गियों में रहने वाली सुजाता अपने हक़ और इंसाफ़ के लिए पूरी बस्ती की आवाज़ बनती है, जहां गरीबी की चीख एक नए बदलाव और उम्मीद का गीत बनकर गूंज उठती है।

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: विजय सांगा
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