सुगंधा, अगर मैं चला गया तो बच्चों का क्या होगा? मेरे बच्चों का पेट कैसे भरेगा ?" सुगंधा की आंखें भर आईं। गरीबी ने जैसे गला पकड़कर उसका उत्तर छीन लिया। अन्तिम चीखरघुवीर की हालत बिगड़ती चली गई। एक रात उसने बच्चों को पास बुलाया। सुरेश उसके पैर के पास खड़ा था, रवि उसकी गोद में सिर छुपाए था, और गुड़िया हाथ थामे रो रही थी।उसकी आंखों से आंसू बह निकले, “बच्चों, तुम्हारा बाबा तुम्हें बहुत कुछ देना चाहता था, लेकिन गरीबी से लड़ नहीं पाया..."
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