ज़िन्दगी में हमें दो तरह के लोग मिलते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो आपकी अच्छाई में भी बुराई ढूँढ लेते हैं। उनके लिए आपकी सफलता, आपकी सरलता और आपकी भोलेपन भी एक कारण बन जाती है नफ़रत का। ऐसे लोग दरअसल आपके गुणों से नहीं, बल्कि अपने हीन-भाव से परेशान होते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो आपकी कमज़ोरियों और खामियों को जानने के बावजूद भी आपसे प्रेम करते हैं। वे आपको वैसे ही अपनाते हैं जैसे आप हैं। यही लोग आपके सच्चे साथी, सच्चे मित्र और सच्चे रिश्तेदार कहलाते हैं। रिश्ता वही मज़बूत होता है जहाँ परिपूर्णता की अपेक्षा नहीं होती, बल्कि अपूर्णता को भी सहजता से स्वीकार किया जाता है। यही संबंध की असली कसौटी है "जो आपकी अच्छाई पर गर्व करे और आपकी बुराई को भी प्यार से अच्छाई में बदल दे, वही आपके जीवन का सच्चा रिश्ता है।"
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