छांव हैं बुजुर्ग, सारा घर है इनमें समाया। इनका अनुभव, हर दुख में राह दिखाया। झुर्रियों में छिपी मेहनत और उम्र का रंग, इनकी आंखों में बसी प्यार की तरंग। खामोश होते हैं, मगर बहुत कुछ कह जाते। हम बच्चों को अपनी गोदी में सुला जाते। जिन हाथों ने बचपन का सहारा दिया, उन्हीं को बुढ़ापे में न भूलना चाहिए। धीरे चलते कदमों में जीवन की कहानी, इनके संग बीते पलों की अमिट निशानी। बचपन की मिठास इनकी बातों में बसती, हर सुबह ये दुआओं की हवा बह चली।
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