नारी है ममता, नारी है दया, उससे ही गूंजे घर-आंगन सया। वो धरती बनकर सह लेती भार, हर दुख में ढूंढे वो सुख का सार। नारी ही है अग्नि, नारी ही जल, उसके बिना अधूरा है जीवन का पल। वो लक्ष्मी है, सरस्वती है, दुर्गा का रूप, हर भूमिका में निभाए अपना स्वरूप।
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