इस ज़िंदगी के सफ़र में थकान बहुत है, वफ़ाओं के बदले यहाँ गुमान बहुत है। अपनों के अपनों पर यहाँ इल्ज़ाम बहुत है, हर सच्ची मोहब्बत पे अरमान बहुत है। शिकायतों का दौर देखती हूँ तो थम जाती हूँ, हर मोड़ पे किस्मत का इम्तिहान बहुत है। ख़ामोशियों में भी छुपे बयान बहुत है, हर हँसी के पीछे दर्द-ए-जहान बहुत है। उम्र कम लगती है ये सफ़र निभाने को, मगर राहों में काँटों का निशान बहुत है। सपनों की रोशनी बुझ गई है आँधियों में, अब दिल के अंधेरों में ही मकान बहुत है। सच की तलाश में जली हूँ हर तरफ़, झूठ के मेले में मगर दुक़ान बहुत है। 🍂🍂🍂
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